More than a poem this is a memory of my childhood.  Having spent my early childhood in UP, a region dominated by hindi speaking population, I can’t help but write in hindi about my childhood.  Writing about it in english kind of takes away from the nostalgia.  So over to my nostalgic memories…

नानी की उँगलियों से बालों मे तेल लगवाना
सर्दी की धूप मे सूखती रजाई पे सो जाना
रात को अंगीठी की सेक मे कहानियाँ सुनना
सुबह के कोहरे मे रजाई से बाहर ना निकलना
कितना मीठा था बचपन का सपना…

स्कूल खुलते ही गर्मी की छुट्टियों का इंतज़ार करना
नानी के घर जाने से ज्यादा ट्रेन मे बैठने की खुशियाँ
दोस्तों के साथ पत्थर मार के आम तोड़ना
मीठे तरबूज़ खाके खुश हो जाना
कितना मीठा था बचपन का सपना…

बारी बारी दोस्त्त की साइकिल चलाना
छोटी-छोटी बातों पे रूठ के रोना
वो लड़ना झगड़ना और मनाना
अपनी ही गुडिया की शादी करके उदास हो जाना
कितना मीठा था बचपन का सपना…

~Anamika

© 2008 Anamika

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