डर लगता है समुन्दर की गहराइयों से
साहिल तो कब का छूट गया अंधेरों मे

नील ही नील है समुन्दर और आसमान में 
मझधार मे झूलती हुई समुन्दर के थपेडों में

नील जहाँ मे आगे बढ़ने से डरती हूँ
साहिल की परछाई का सहारा ढूँढती हूँ

~अनामिका
 
© 2008 Anamika

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